दावा-भारत में रूस से 30 गलत पहचान वाले जहाज पहुंचे:इनसे 54 लाख टन कच्चा तेल आयात हुआ; भारत फॉल्स-फ्लैग जहाजों की सबसे बड़ी मंजिल बना

व्यवसायप्रकाशित: 28/11/2025
bhaskar
दावा-भारत में रूस से 30 गलत पहचान वाले जहाज पहुंचे:इनसे 54 लाख टन कच्चा तेल आयात हुआ; भारत फॉल्स-फ्लैग जहाजों की सबसे बड़ी मंजिल बना

फिनलैंड के थिंक टैंक CREA ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने 54 लाख टन रूसी कच्चा उन 30 जहाजों से आयात किया, जो गलत पहचान (फॉल्स फ्लैग) का इस्तेमाल कर भारत पहुंचे। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने कहा कि भारत ने जनवरी से सितंबर 2025 के बीच ये तेल आयात किया। इस अवधि में भारत दुनिया भर में ऐसे गलत पहचान से तेल ले जाने वाले जहाजों की सबसे बड़ी मंजिल बना। प्रतिबंधों से बचने बचने रूस ने शैडो फ्लीट भेजे रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने अपने शैडो फ्लीट यानी पुराने, बिना मालिकाना हक वाले और ट्रैकिंग सिस्टम बंद वाले जहाजों का उपयोग बढ़ा दिया है। CREA का दावा है कि 2025 के पहले नौ महीनों में कुल 113 रूसी जहाज फॉल्स फ्लैग के तहत संचालित हुए और उन्होंने लगभग 11 मिलियन टन 21 हजार करोड़ रुपए का कच्चा तेल ढोया। इनमें से अकेले करीब 10 हजार करोड़ रुपए का 54 लाख टन तेल भारत पहुंचा। 4 सवाल-जवाब में भारत और रशियन ऑयल इंपोर्ट की पूरी कहानी 1. भारत ने रशियन तेल खरीदना क्यों बढ़ाया? 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर सैंक्शन लगे। रूस अपना तेल बहुत सस्ता बेचने लगा। पहले भारत रूस से तेल नहीं खरीदता था, लेकिन अब रशियन क्रूड 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलने लगा। भारत की रिफाइनरी कंपनियां (रिलायंस, IOC, नायरा, HPCL) ने मौका देखा और खूब तेल खरीदा। 2023-2025 में भारत रोज 17-19 लाख बैरल रशियन क्रूड खरीदने लगा। इससे भारतीय कंपनियों को करोड़ों रुपए की बचत हुई। 2. अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने रूस पर क्या-क्या सैंक्शन लगाए? 3. भारत पर क्या असर पड़ा? 4. अब क्या हो रहा है और आगे क्या होगा?

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