भारत का रूसी तेल आयात दिसंबर में तीन साल के न्यूनतम स्तर पर आ सकता है। अभी भारत रूस से करीब 18 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) क्रूड ऑयल खरीद रहा है। दिसंबर में यह 6-6.5 लाख bpd रहने का अनुमान है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिकी, यूरोपीय और ब्रिटिश प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो, इसके लिए रूसी कच्चे तेल की खरीदी में तेजी से कटौती शुरू कर दी है। रिफाइनर्स अब रूसी तेल का अल्टरनेटिव सोर्स ढूंढ रहे हैं। रूस से तेल ना खरीदने का मुख्य कारण अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के रूस पर ताजा प्रतिबंध हैं। US–EU प्रतिबंधों के बाद सख्ती अमेरिका के ताजा प्रतिबंध में रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रॉसनेफ्ट और लुकोइल पर सख्ती की गई है। खरीदारों को 21 नवंबर तक इन कंपनियों से लेनदेन बंद करने को कहा गया था। वहीं यूरोपीय यूनियन ने 21 जनवरी 2026 की आखिरी तारीख तय की है। इसके बाद किसी भी रिफाइनरी द्वारा 60 दिन पहले के रूसी क्रूड प्रोसेस करके बने ईंधन को यूरोप में नहीं बेचा जा सकेगा। भारतीय बैंकों ने जांच बढ़ाई इन्हीं प्रतिबंधों के चलते अमेरिका और यूरोप से हो रहे ट्रांजैक्शन की भारतीय बैंकों में जांच भी कड़ी हो गई है। इससे भारत के सरकारी रिफाइनर भी अलर्ट हो गए हैं। अधिकांश भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल खरीदी रोक दी है। मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और HPCL–मित्तल एनर्जी अब रूस से तेल नहीं ले रहे। इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम ने कहा है कि वे केवल उन्हीं रूसी सप्लायर्स से खरीदेंगे जो प्रतिबंधित सूची में नहीं हैं। नायरा एनर्जी, जिसमें रॉसनेफ्ट की हिस्सेदारी है, फिलहाल केवल रूसी तेल ही प्रोसेस कर रहा है। 4 सवाल-जवाब में भारत और रशियन ऑयल इंपोर्ट की पूरी कहानी 1. भारत ने रशियन तेल खरीदना क्यों बढ़ाया? 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर सैंक्शन लगे। रूस अपना तेल बहुत सस्ता बेचने लगा। पहले भारत रूस से तेल नहीं खरीदता था, लेकिन अब रशियन क्रूड 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलने लगा। भारत की रिफाइनरी कंपनियां (रिलायंस, IOC, नायरा, HPCL) ने मौका देखा और खूब तेल खरीदा। 2023-2025 में भारत रोज 17-19 लाख बैरल रशियन क्रूड खरीदने लगा। इससे भारतीय कंपनियों को करोड़ों रुपए की बचत हुई। 2. अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने रूस पर क्या-क्या सैंक्शन लगाए? 3. भारत पर क्या असर पड़ा? 4. अब क्या हो रहा है और आगे क्या होगा?
भारत पिछले तीन साल में सबसे कम रूसी-तेल खरीदेगा:दिसंबर में 18 लाख की जगह 6 लाख बैरल-पर-डे क्रूड आयात का अनुमान; अमेरिका-EU प्रतिबंधों का असर
व्यवसायप्रकाशित: 28/11/2025
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